• Pooja Jain

आर्या..Tale Of A Roaring Lady

Updated: Jul 13, 2020



"दिखने में तो सब फूल लगते हैं वक्त आने पर अफीम बन जाते हैं"

कितना सच है ना, असल जिंदगी में भी कहाँ हम किसी का असली रूप पहचान पाते हैं।

आर्या देखने के दो कारण थे पहला तो यह कि मैं अनु सिंह चौधरी जी की फैन हूँ उनकी तीनों किताबें मैंने पढ़ी हैं। मम्मा की डायरी मेरी पसंदीदा है। और दूसरा मैं सुष्मिता जी को मैं रेस्पेक्ट करती हूं, जिस तरह उन्होंने अपनी दोनों को बेटियों को पाला है और खासकर दूसरी बेटी को गोद लेने से पहले जिस कानूनी दांव पेंच में वे उलझी भी और जीती भी इसलिए।

सुष्मिता जी ने जबरदस्त वापसी की है पर्दे पर। कमाल एक्सप्रेशन, गजब बॉडी लैंगुएज, जैसे आर्या की आत्मा उन्होंने खुद में ले ली। बात करते हैं आर्या की....

पिछले 17 साल से आर्या जिस भंवर से निकलने की कोशिश कर रही थी एक हादसे ने फिर से उसे वापस उसी दुनिया में लाकर खड़ा कर दिया । कुछ कारणों से पति की मौत के बाद अपने पिता के गैर कानूनी दवाइयों और ड्रग्स के काम को आर्या को संभालना पड़ता है।

रिश्तो की उधेड़ बुन और मां की ममता दोनों को दिखाती हुई एक अद्भुत सीरीज। एक मां अपने बच्चों के लिए शेरनी की तरह पंजे बाहर निकाल सकती है यह आर्य ने बखूबी दिखाया।

ड्रग्स और इलीगल दवाइयों के धंधे से जुड़े हुए होते हुए भी सीरीज में गालियों का इस्तेमाल बहुत कम है जो कि इसकी सबसे बड़ी खास बात लगी मुझे।

कैसे एक हादसा एक छोटे से बच्चे पर मानसिक दुष्प्रभाव डालता है यह बखूबी दिखाया गया है टीनएज फ्रस्ट्रेशन मां और बच्चों के बीच की बॉन्डिंग और पुराने हिंदी फिल्मी गाने इस सीरीज की यूएसपी हैं।

जब-जब आर्य मुश्किल में होती है उसको गीता के अध्याय के साथ जिस तरह जोड़ कर दिखाया गया है वाकई काबिले तारीफ है फिर इसका अंत आपको स्तब्ध कर देगा और जो गीता का सार दिखाया गया है वह देखकर बस मजा आ जायेगा। कमाल की बात ये है उसके बोल भी Anu Singh जी ने ही लिखें हैं।

बॉब जो आर्या की छोटी बहन का पति है वो भगवद गीता को म्यूजिक एल्बम में ढालना चाहता है। अंत मे वह दिखा देता है कि वह न सिर्फ गीता पढ़ता है बल्कि गीता के श्लोकों पर विश्वास करता है और मानता है कर्म ही उसका धर्म है।

जो सबसे बड़ी बात मुझे समझ में आई वह यह कि कभी भी रिश्तो में परफेक्शन नहीं ढूंढने चाहिए हम में से कोई भी परफेक्ट नही है इसमें कोई शक नहीं। अगर रिश्तों में परफेक्शन ढूंढेंगे तो अकेले रह जाएंगे।

लॉ ऑफ कर्मा को मैंने इससे अच्छा execution मैंने कभी नहीं देखा। जब भी आर्या को कोई बड़ा निर्णय लेना होता है गीता का कोई श्लोक उस सीन और सिचुएशन को जस्टिफाई करता है।

यह सीरीज भी आप परफेक्शन के लिए नहीं एग्जीक्यूशन के लिए देखिए।

"कभी कभी चॉइस सही और गलत की नही, गलत और कम गलत की होती है"! फेवरेट कोट☺️☺️


Love Sushmita... Waiting for more!


Anu ji marvellous job, I am so glad that I know you.


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