• Pooja Jain

Bandish Bandits

Updated: Sep 2, 2020

What happens when Classical meets Pop?


What happens when East meets West?


What happens when traditional meets contemporary?


मोरे सैयां मैं लागू तोरे पैयां, बलमवा मत जाओ परदेस ...

ये बोल हैं हाल ही में अमेज़न प्राइम पर आयी सीरीज Bandish Bandits के।

पूर्व और पश्चिम की जुगलबंदी कराती Bandish Bandits उदयपुर के शास्त्रीय संगीत वाले "राठौड़ घराने " और एक "यू टयूब" पॉप सिंगर के इर्द गिर्द बुनी गयी है।


Bandish Bandits के किरदारों की बात करें तो नस्सरूद्दीन शाह जी ने "पंडित जी" का किरदार निभाया है जो की संगीत सम्राट हैं। ऋत्विक भौमिक "राधे" के किरदार में हैं जिसमें पंडित जी आने वाले संगीत सम्राट को देखते हैं। इनके अलावा श्रेया चौधरी (तम्मना),राजेश तैलंग (राकेश,पंडित जी के बेटे और राधे के पिता) और शीबा चड्ढा (मोहिनी ,राधे की माँ) के किरदार में हैं।


Bandish Bandits कहानी है राधे की, उसके संगीत सम्राट बनने की ,अपने से अलग रहन सहन और सोच वाली तम्मना से प्यार की। शास्त्रीय संगीत के सख्त नियमों का पालन करते हुए कैसे "मास्क मैन " बनकर अपने संगीत के साथ न्याय और आर्थिक तंगी झेलते हुए परिवार की मदद करता है , किन हालातों से गुजरता है ये देखना दिलचस्प है। गंडा बंधन से शुरू होकर ये सफर संगीत सम्राट तक किस तरह पहुँचता है यही है Bandish Bandits.


Bandish Bandits में पंडित जी का ईगो ,घराने को बचाने के लिए उनका किसी भी हद जाना शामिल है। गुरु शिष्य का अनोखा रिश्ता है तो एक माँ का अपने टूटते हुए बेटे को सम्बल देना भी। प्यार का क्षितिज ढूंढ़ते उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से प्रेमी हैं तो सहारा और गालियां देने वाले दोस्त भी। अपने पिता को दुनिया के दुःखों से दूर रखते बेटे हैं तो अपने सपनों की गठरी बांधकर कोने में रख देने वाली बहु भी। आपसी टकराव की जुगलबंदी हैं तो प्रेम की बंदिशें भी। अपनी बेटी को दुनिया की कड़वी सच्चाइयों से दूर रहता पिता है तो सपनों को मोल देकर खरीद लेने की जिद्द रखने वाली माँ भी।


क्लासिकल और पॉप के बीच रची बसी Bandish Bandits गायकी घरानों वाली शुद्ध बंदिशों ,शास्त्रीय संगीत के नियमों , और यू टयुब के लाइक्स ,बेहतरी के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरणों का फर्क साफ़ करती है। ये बता देती है की अंत में आपकी प्रतिभा ही आपको आगे ले जा सकती है कोई फालसेटो(शॉर्टकट) नहीं।


शुद्धिकरण की प्रक्रिया हो या मास्क्ड मैन बनकर अपने घराने और घर को बचाना राधे ने हर जंग लड़ी अपने सपने को पाने के लिए। रोलप्ले करते हुए प्रेम के धागों में उलझा हुआ राधे जब अपने परिवार की सचाईओं से वाकिफ होता है तो कैसे वो पंडित जी की नाराजगी और उनके अबोले से संघर्ष करता हुआ आगे बढ़ता है और साथ में अपनी #CoupleGoals तमन्ना को भी उसके सपने को सच कर दिखाने के लिए प्रेरित करता है।


Bandish Bandits म्यूजिकल सीरीज है तो म्यूजिक की बात तो होगी ही। संगीत बेहद खूबसूरत है,ऑथेंटिक भी है। शास्त्रीय संगीत और उससे जुड़ी बातों का भी काफी ध्यान रखा गया है , ऐसा मैं इसलिए कह पा रही हूँ क्यूंकि बेगम अख्तर पर आधारित अख्तरी मैंने पढ़ी है। गंडा बंधन,घराना ,बैठने का सलीका आदि सब उसी पुस्तक से मुझे पता चला था।


हवेली, राजे रजवाड़ो का संगीत में दखल और खासकर संगीत सम्राट चुनना बहुत मुश्किल प्रक्रिया होती है। और जिस शिष्य का गंडाबंधन हो जाए उसे खास दिनचर्या, रियाज़ का तरीका सब एक निश्चित तरीके से ही करना होता है और त्रुटि होने पर गंडा वापिस ले लिया जाता है। शास्त्रीय संगीत की सबसे बड़ी परंपरा गंडा बंधन है जिसमे गुरु अपने शिष्य को विरासत सौंपता है वह निश्चित ही आसान तो नहीं होगी।


आत्मस्वर्णा,आत्मसंघर्ष ,आत्मसम्मान और आत्मविश्लेषण करते हुए किरदारों से और घटनाओं से बंदिशें करती हुई यह सीरीज देखी जा सकती है। पर एक बहुत बड़ी बात जो मुझे खली वो यह की गालियों की जरुरत तो कहीं भी नहीं थी फिर क्यों इसमें ये ठूसकर एक बेहतरीन बनती सीरीज से आम बना दिया। OTT कंटेंट है और बिना सेंसर किये हुए दिखाया जा सकता है इसका मतलब ये तो नहीं की गालियां दिखानी जरुरी ही हैं।


हर किरदार ने शानदार एक्टिंग की है और सबसे ख़ास बात की कोई भी किरदार जबरदस्ती दिखाया जाने वाला नहीं लगा। नसीरूदीन जी के होते हुए भी कोई भी किरदार कमतर नहीं लगा। यहाँ तक की छोटा सा किरदार निभाने वाली त्रिधा चौधरी (इन्होने संध्या का किरदार निभाया है ) और मेघना मलिक (तम्मना की माँ ) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।


अगर मुख्य किरदारों के अलावा कोई पहले नंबर पर आएगा तो वो हैं शीबा जी, तैलंग जी को उनके बाद वाला स्थान मिलेगा। दोस्तों के रूप में कुणाल राय कपूर, राहुल कुमार और अमित मिस्त्री (वैसे तो ये राधे के काका हैं पर सीरीज देखिएगा तो समझ आएगा मैंने दोस्त क्यों कहा ) ने बढ़िया साथ निभाया है , नहीं नहीं सिर्फ गालियां देकर नहीं और भी बहुत कुछ था इनके जिम्मे।


Bandish Bandits सीरीज 10 एपिसोड्स की है ,आम से हटकर तो है ही पर सीख भी है की संघर्ष के बिना सपनों को नहीं जिया जा सकता और जीवन में लक्ष्य का होना कितना जरुरी है। एक और बात जो नायिका सिखाती है वो ये की नयी शुरुआत कभी भी की जा सकती है।


पंडित जी का किरदार जिस तरीके से अपने आप को बदलता है वो निश्चित ही बहुत सही है क्योंकी अगर आप समय के साथ नहीं बदलते तो आप पीछे रह जाते हैं। अपने आपको ही देखिये ना ,कोरोना के पहले और बाद में कितना बदलाव आया है। किसी भी संघर्ष में अगर पूरा परिवार साथ चले तो किसी भी "बैंडिट" से निपटना आसान हो जाता है।


अंत बहुत ही सुखद और भावविभोर करने वाला है, मुझे पूरी उम्मीद है इसका दूसरा सीजन आएगा। बंदिशों के राजस्थानी रंग में रंगना चाहते हैं तो जरूर देखिये, अगर म्यूजिक में रुचि है तो जरूरअच्छी लगेगी और नहीं तो देखिये शायद हो जाए क्यूंकि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत मन के हर कोने तक पहंच जाता है।


दिग्विजय राठौड़ का विरह सुनते हुए जहाँ पलकों में नमी महसूस करेंगे .... तो राधे का श्रृंगार रस आपको प्रेम में सराबोर कर देगा।


क्या कहाँ कौन दिग्विजय ?


तो ये एक बड़े घराने का बड़ा राज है देखिये और जानिये , यहाँ स्पोइलर हो जाएगा।


इतना समय देने के लिए शुक्रिया ! अगर देख ली है तो कमेंट करके बताइये कैसी लगी और अगर नहीं तो देख ही लीजिये फिर बताइये , हम भी यहीं हैं आप भी।



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