• Pooja Jain

भंवरजाल का मल्लाह


"भवसागर के चक्रव्यूह में अटकी , संघर्ष की जीवन नौका को ...

पार लगा दे.... ऐसा कोई , मल्लाह मिल जाए....

मिल ही जाए उसे उसका ...

"भंवरजाल का मल्लाह!!!"


Binny जी की भंवरजाल का मल्लाह, ये कहानी है आत्रि की , अरिहा की , पुण्या की , सरांग की ! कहानी है रहस्य्मयी पहाड़ी की ,जंगल की और समय को बाँधने की।

अगर आपको हैरी पॉटर, नागिन आदि यानी रहस्य्मय कहानियां पसंद हैं तो ये पुस्तक आपके लिए है। कहानी के बारे में ज्यादा बात करना उचित नहीं क्यूंकि ये सीरीज में आएगी।


रहस्य और रोमांच से भरी ये कहानी माँ का प्यार , निश्छल प्रेम,जादू सब समेटे हुए है। भाषा आसान और सधी हुई है। लेखिका ने कथानक और चरित्र चित्रण बहुत अच्छे से किया है। पात्रों और घटनाओं को समुचित विस्तार के साथ घड़ा गया है। इस तरह के कथानक की सबसे बड़ी जरुरत होती है की पाठक खुद को वहां महसूस करे और काफी हद तक लेखिका इसमें कामयाब भी हुई है।


वर्तमान और भूतकाल के बीच चल रही इस कहानी का भविष्य क्या होगा ये तो आगे आने वाले हिस्सों में पता चलेगा लेकिन यहाँ एक छोटा सा अंश डालकर इसकी एक झलक देना चाहूंगी .....


"बार बार अपनी मन की शक्तियों से खुद को स्वस्थ कर चुके पुण्या की ऊर्जा कुछ कम हो गयी थी , वो जमीन पर थका पड़ा हुआ सत्या से हाँफते हुए कहता है। ...

इस बार सुरक्षा कवच का निर्माण कहीं अधिक मजबूत करियेगा। अभी हमें उत्तर से दक्षिण की और टेलीपोट होते कईं लोगो ने देख लिया। हमारी वास्तविकता वर्तमान में उजागर हो यह ठीक नहीं। "


इस पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत है इसकी रिसर्च और डिटेलिंग। हर अध्याय के साथ जुड़े कलर्ड इंसर्ट्स बेहद खूबसूरत है और अध्याय को बखूबी बयां करते हैं।


पसंद का Genre ना होते हुए भी इसको पढ़ने का कारण तो यही है की एक पाठक के तौर पर खुद को दायरे में कैद नहीं करना था। और आपके समक्ष लाने का लाने का कारण ये की अगर ये पुस्तक अंग्रेजी में लिखी गयी होती तो इसको भरपूर पाठक मिलते। टाइम ट्रेवल और Sci-fi का मिश्रण और जैसा की मैंने बताया की ये पुस्तक 6 से 7 भागों में आएगी और कम से कम मैंने हिंदी में ऐसे सीरीज नहीं देखे। अंग्रेजी में ये बहुतायत होते हैं ; तो लेखिका के इस नए प्रयोग और मेहनत को आपके समक्ष रखकर मुझे ख़ुशी हो रही है।


ये लेखिका की पहली पुस्तक है लेकिन भाषा विन्यास देखकर महसूस नहीं होता। एक बानगी देखिये ....


"सांझ की शीतलता तले ,मिलान को व्याकुल इस प्रेम पक्षी को देख ऐसा लग रहा था, मानों ,प्रातः के आगमन पर बिछड़े ,आदित्य की रश्मियों को खुद में समेटने को आतुर ... पूरनमासी के चांद की ठंडक को ,सांय का आसमा तो मोहब्बत की जमीं मिल गयी ... जिससे अभिसार पर इनके फिजाओं में घुले इश्क़ के रंग कईं ... जो क्र गया सिन्दूरी ... फलक को भी अनंत तक कहीं ... "


ऐसी कहानियों में जैसा की होता है किरदार बहुत होते हैं तो मुझे थोड़ी उलझन हुई क्यूंकि मैंने पहली बार इस तरह की पुस्तक पढ़ी थी ,लेकिन आने वाले भागों में कहानी रफ़्तार लेगी और किरदार जमते जाएंगे ऐसा मेरा विश्वास है।



लेखिका को प्रथम प्रयास के लिए हार्दिक शुभेछा और आगे केलिए शुभकामनायें।


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